नया फरमान आया है

ज़बाने काट लेंगे वो, जो मुह खोलेगा अब कोई 
हमें पेरेंगे कोल्हू में नया आदेश आया है !

जो कोसों दूर बैठे हैं, धरातल की हकीकत से 
सुधारेंगे वो अब सबको नया संदेश आया है !

कमीशनखोर लेंगे अब, कमीशन और भी ज्यादा 
शिकारी खुद बदल कर के नया एक भेष आया है !

नवाचारी बने फिरते हैं, सिस्टम के जो दीमक थे 
बदलते रंग गिरगिट सा, नया रंगरेज आया है !

ये सिस्टम है बना अब सल्तनत, उनकी बपौती की 
नया तुगलक नए फरमान से लबरेज़ आया है !

कहेंगे कि भरोगे दूध चलनी में वो अब सबसे
दिखा के राम का सपना कोई लंकेश आया है !

                  ©️ दीपक शर्मा 'सार्थक'





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