अति सर्वत्र वर्जयेत्
खैर ये कहानी सही है या गलत मुझे नहीं पता पर इस कहानी का मेरे बाल मन के ऊपर इतना फर्क़ जरूर पड़ा कि मैंने बचपन में कुंदरू खाना बंद कर दिया था। मैं नहीं चाहता था कि जो थोड़ी बहुत बुद्धि है वो इसे खाकर कम न हो जाए।लेकिन अब जब इस कहानी के बारे में सोचता हूं तो इसके कुछ अलग ही अर्थ मष्तिष्क में आते हैं।
इतना तो मानना ही पड़ेगा कि अति हमेशा बुराईयां लेकर आती है। किसी भी चीज की अधिकता मनुष्य में विकृति ही पैदा करते हैं। थोड़ा गौर से देखें तो समाज में इसे असानी से देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए जिसके पास आवश्यकता से अधिक पैसा है तो उसके जीवनशैली में विकृति आ जाती है। जहां कोई गरीब आदमी बाजार से मौसमी सस्ती सब्जियां खरीदता है। वही पैसे वाला उन सब्जियों को खरीदेगा जो महंगी हो। और महंगी सब्जियां कौन होती हैं जो बेमौसम की हो यानी जुलाई-अगस्त में पैसे वाले गोभी और मूली जैसी जाड़े वाली सब्जियां खरीदते हैं। वहीं दिसंबर जनवरी में भिड़ी बैंगन जैसी गर्मी वाली सब्जियां खरीदते है। अब ये पैसों से पनपी विकृति ही तो है जो बेमौसम की सब्जियां अमीरों के लिए तमाम रासायनिक दवाइयों के छिड़काव के माध्यम से पैदा की जाती है। जबकि देखा जाये तो पेस्टीसाइड डालकर पैदा की गई सब्जियां ज़हर के समान होती हैं।
ऐसे ही महान पॉप सिंगर और डांसर माइकल जैक्सन का उदाहरण लिया जा सकता है। एक समय था जब माइकल जैक्सन के लिए पूरे यूरोप और अमेरिका की लड़कियां दीवानी थी। माइकल जैक्सन करोड़ों लड़कियों की दिल की धड़कन थे। मैंने एक बार कहीं पड़ा था कि माइकल जैक्सन को लेकर लड़कियों में कुछ इस कदर का पागलपन था कि एक बार माइकल जैक्सन ने स्टेज पर एक लड़की का हाथ पकड़ कर डांस कर लिया था। तो वो लड़की महीनों तक नहीं नहाई। क्योंकि वो नहाकर माइकल जैक्सन की खुशबु हटाना नहीं चाहती थी। यानी एक तरह का पागलपन ही तो था। अब यहां सोचने वाली बात है कि जहां एक आम आदमी मुश्किल से किसी एक लड़की का दिल जीत पाता है वहाँ माइकल जैक्सन के ऊपर करोड़ों लड़कियां जान छिड़कने के लिए तैयार बैठी थी।यानी लड़कियों की अति तो गई थी। फिर माइकल जैक्सन के अंदर इस अधिकता से कैसी विकृति आयी, ये पूरी दुनियां को पता है। उसपर छोटे छोटे बच्चों के यौन शोषण के आरोप लगे। उसने बच्चों का यौन शोषण करके अपनी वासना को शांत किया।ये विकृति नहीं तो और क्या था।
ऐसे ही नेहरू जी को चीन पर अति भरोसा था। उनका चीन पर यहां तक भरोसा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन की स्थायी सदस्यता दिलवाने में उनका बहुत बड़ा हाथ था। फिर क्या था 1962 में उनके अति भरोसे को चीन ने तार-तार कर दिया। कहा जाता है नेहरू इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाए। यही उनके हार्दिक अटेक का कारण बना।
इसी तरह तालिबान और बोको हरम जैसे संगठन अति धर्मान्धता में पड़कर लाखों लोगों की जान ले चुके हैं।
शायद इसीलिए शास्त्रों में पहले ही लिख दिया गया था कि "अति सर्वत्र वर्जयेत्"
©️ दीपक शर्मा 'सार्थक'
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