मूल्यांकन

वैसे तो हर इंसान का किसी दूसरे इंसान का मूल्यांकन करने का अपना एक अलग मैथेड होता है। और ये पूरी तरह व्यक्तिगत मसला है। पर मैं किसी को कैसे जेज करता हूँ, ये बिना किसी लाग लपेट के आप से साझा कर रहा हूं-
1- अगर कोई मेरे सामने चाय की जगह कॉफी की तारीफ करता तो समझ लो अपना पूरा सम्मान मेरी नजरो में खो बैठा। 
2- अगर कोई व्यक्ति पुराने गाने खास कर मो. रफी किशोर और लता के गाने पसन्द करता है तो वो उसपर भरोसा कर सकता हूँ। 
3- हनी सिंह को सुनने वालों को देख के गुस्सा आता है..जैसे मेरी कोई व्यक्तिगत खुन्नस हो। 
4- कुमार सानू के गाने सुनने वालों के प्रति लखनऊ के टैंम्पू चालकों के जैसी फिलिंग आती है। भले ही वो टैक्सिडो पहने हो। 
5- गुलाम अली,  जगजीत सिंह की ग़ज़लें सुनने वालों को बुद्धिमान समझता हूं। 
6- जिसकी the dark night , फेवरेट मूवी है, और जो jonny depp को पसन्द करता है वो तो समझो अपना भाई है। 
7- जिसको श्याम बेनेगल,  ऋषिकेश मुखर्जी, की फ़िल्में पसन्द है..वो मुझे पसन्द है..भले ही उसमे सौ ऐब हों। 
8 - जिसको साहित्य छू कर भी निकल गया है। उसे भावनात्मक व्यक्ति मानता हूं। अंदर से उसके प्रति सम्मान आता है। 
9 - जिसने games of throne,  house of card, spartacus, dark जैसी वेब सीरीज नहीं देखी।और भारतीय वेब सीरीज की तारीफ करने लगता है तो उसपर हँसी आने लगती है। 
10- और अंत में जो महिलाएं अपने होठों पर एक गाढ़ी आउटर लाइन या कह लीजिए आउटर रिंग रोड बना कर फिर लिपस्टिक लगाती हैं। और आदिवासियों की तरह खूब गाढ़ा फाउंडेशन (मुर्दासंख) लगाती हैं, उनको देख के दया आती हैं। 
( ये मेरे अपने विचार हैं, इसका किसी जीवित या जीवित होते हुए भी मृत हैं, उनसे कुछ लेना देना नहीं है)

                 ©️ दीपक शर्मा 'सार्थक'

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