मुख़ातिब हो के ग़ैरों से
कभी दिल की कही है क्या
किया जाहिर नहीं ख़ुद को
कसक दिल में नहीं है क्या
दमन करके मोहब्बत का
मिटाके ख़्वाहिशे अपनी
सदा उलझे रहे इसमे
ग़लत क्या है सही है क्या
वैसे तो आज का दिन पंडित नेहरू को याद करने का है लेकिन प्रश्न ये उठता है कि नेहरू याद किसको हैं। दशकों पहले नेहरू को लेकर कुछ संस्थाओ और उनसे जुड़े पाखंडी लोगों ने अभियान चलाकर ज़हर की खेती की। उनको ग्यासुद्दीन गाजी का वंशज बताया गया। उनको कामुक अश्लील व्यक्ति बताकर दुष्प्रचार किया गया। और अब तो इस ज़हर से सींच कर तैयार की गई पूरी एक पीढ़ी है जो दिन रात, बिना इतिहास की एक पुस्तक पलटे नेहरू को गाली देने में लगी है।नेहरू की सोच का यदि 10 पर्सेंट भी अगर सोच लें तो जिनकी खोपड़ी दग जाए ऐसे लोग भी नेहरू का मूल्यांकन करने मे लगे हैं। हम भारतीयों की शुरू से समस्या रही है। खुद चाहे जैसे हों लेकिन नेता हमको ऐसा चाहिए जो ब्रह्मचारी हो। महिलाओ से जिसका कोई लेना-देना न हो। नेहरू की विभिन्न महिलाओं के साथ खींची गई तस्वीरों को आधार बनाकर उनकी आलोचना करते हैं।उनको ऐयाश बताने में लगे रहते हैं। वही दूसरी तरफ लाल बहादुर शास्त्री जी की अपनी पत्नी के साथ दो फिट दूर बैठी एक फोटो को आदर्श बताने में लगे हैं(इसमें कोई दो राय नहीं कि वो इस देश के आदर्श हैं, लेकिन इसका कारण ये नहीं कि वो अपनी पत्नी से ...
वर्तमान समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ताश के पत्तों में खेले जाने वाले ’दहिला पकड़’ खेल में चुने गए ’ट्रंप के पत्ते’ का रुतबा एक सा नजर आ रहा है। जिन्होंने ये खेल नहीं खेला उनको बता दूं, ये एक ऐसा खेल है जिसमें एक वेराइटी वाले पत्ते को ट्रंप मान किया जाता है। खेल में कोई कितना भी बड़ा पत्ता फेंके किन्तु यदि उसके सामने ट्रंप की दुक्की भी आ गई तो वो उस दूसरे पत्ते पर भारी मानी जाती है। अमेरिकी राष्ट्रपति को उनका ये रुतबा, उनके प्रभावशाली देश की अर्थव्यवस्था से मिला हुआ है। राम चरित मानस में एक चौपाई से इसे समझा जा सकता है "परम स्वतंत्र न सिर पर कोई। भावइ मनहिं करहु तुम्ह सोई॥" और ये कोई आज की बात भी नहीं है, द्वितीय विश युद्ध के बाद से ही अमेरिका ने विश्व में अपनी पकड़ इतनी मजबूत कर ली है कि आज वो पूरे विश्व का चौधरी बना फिर रहा है। आज उस विषय पर चर्चा केवल इसलिए हो रही है क्योंकि अमेरिका ने ’एज1बी’ पर सालाना शुल्क एक लाख अमेरिकी डॉलर तक बढ़ा दिया है।टैरिफ वार के बीच ये एक और धमाका है जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था हिल गई है। सबसे ज्यादा (लगभग70%) ये बीजा धारी भारतीय...
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