ये नुमाइश जो जीने की करते हैं वो कोई पूछे भी उनसे वो ज़िन्दा है क्या ! है धुरी से अलग न ज़मीं न फलक देखो जिस ओर भी बेखुदी की झलक ज़िन्दगी जब तलक करते रहते हैं क्या ! कोई पूछे भी उन...
क्यों करते हो मजबूर मुझे अपने पदचिन्ह पे चलने को! क्यों करते हो मजबूर मुझे अपने विचार में पलने को ! जिस दृष्टि से तुमने दुनियां को देखा समझा और जाना है जिस दृष्टि से तुमने बु...